समाज सुधारक संत रामपाल जी महाराज

समाज सुधारक संत रामपाल जी महाराज

 संत रामपाल जी महाराज ने अनेक समाज सुधार के कार्य किए हैं नशा  गुटखा तंबाकू शराब  मास आदि को खाना दूर की बात  छूना भी मना किया बहुत से लोगों को इन बुराइयों से दूर किया है संत रामपाल जी महाराज के जो भी अन्याय बनते हैं उनको पहली बार जो नियम दिया जाता है इसका पहला नियम यही है कि नशा नहीं करना है गुटका तंबाकू बीड़ी सिगरेट नहीं खाना है और ना इसमें किसी को सहयोग देना है

तम्बाकू सेवन कितना पाप है ?  परमेश्वर कबीर जी ने बताया है :-- सुरापान मद्य मांसाहारी, गमन करै भोगै पर नारी। सत्तर जन्म कटत हैं शिशम्, साक्षी साहिब है जगदीशम्।। पर द्वारा स्त्रा का खोलै, सत्तर जन्म अन्धा हो डोलै। सौ नारी जारी करै, सुरापान सौ बार। एक चिलम हुक्का भरे, डूबै काली धार।। जैसे कि ऊपर वर्णन किया है कि एक बार शराब पीने वाला सत्तर जन्म कुत्ते का जीवन भोगता है। फिर मल-मूत्रा खाता-पीता फिरता है। परस्त्रा गमन करने वाला सत्तर जन्म अन्धे के भोगता है। मांस खाने वाला भी महाकष्ट का भागी होता है। उपरोक्त सर्व पाप सौ-2 बार करने वाले को जो पाप होता है। वह एक बार हुक्का पीने वाले अर्थात् तम्बाखु सेवन करने वाले को सहयोग देने वाले को होता है। तम्बाखु सेवन करने वाले हुक्का, सिगरेट, बीड़ी या अन्य विधि से सेवन करने वाले तम्बाखु खाने वालों को क्या पाप लगेगा? घोर पाप का भागी होगा। एक व्यक्ति जो तम्बाखु सेवन करता है। जब वह हुक्का या बीड़ी-सिगरेट पी कर धुआं छोड़ता है तो वह धुआं उस के छोटे-छोटे बच्चों के शरीर में प्रवेश करके हानि करता है। वे बच्चें फिर शीघ्र बुराई को ग्रहण करते हैं तथा उनका स्वास्थय भी बिगड़ जाता है।


मदिरा (शराब) पीना कितना पाप है :- 
 शराब पीने वाले को सत्तर जन्म कुत्तेके भोगने पड़ते है। मल-मूत्रा खाता-पीता फिरता है। अन्य कष्ट भी बहुत सारे भोगने पड़ते हैं तथा शराब शरीर में भी बहुत हानि करती है। शरीर के चार महत्वपूर्ण अंग होते हैं। फेफड़े, लीवर, गुर्दे तथा हृदय। शराब इन चारों को क्षति पहुँचाती है। शराब पीकर मानव, मानव न रह कर पशु तुल्य गतिविधि करने लगता है। कीचड़ में गिर जाना, कपड़ों में मलमूत्रा तथा वमन कर देना। धन हानि, मान हानि, घर में अशांति आदि मदिरा पान के कारण होते है। मदिरा सत्ययुग में प्रयोग नहीं होती। सत्ययुग में सर्व मानव परमात्मा के विद्यान से परिचित होते हैं। जिस कारण सुख का जीवन व्यतीत करते हैं। गरीब : मदिरा पीवै कड़वा पानी, सत्तर जन्म स्वान के जानी।

 दहेज मुक्त विवाह:-
दहेज हमारे समाज में बहुत बुरी कुप्रथा जिसको समाप्त करना, संत रामपाल जी महाराज जी का प्रथम  उद्देश्य है इसी अभियान के तहत संत रामपाल जी महाराज  दहेज मुक्त शादियां करा रहे हैं जिसको संत भाषा में रमैणी कहा जाता है जिसमें ना तो दहेज दिया जाता है और ना ही दहेज लिया जाता है जिसमें वर पक्ष को बिना दहेज लिए दहेज मुक्त शादी करानी होती है मात्र 17 मिनट में शादी हो जाती है ना हीं उसमें ज्यादा दिखावा किया जाता है ना इसमें बैंड बाजा बरात नहीं होती संत महापुरुषों की पवित्र बनियों के आधार पर उन को साक्षी मानकर विवाह संपन्न किया जाता है इस प्रकार के समाज सुधार के कार्य में संत रामपाल जी महाराज जी के शिष्य उनके बताए अनुसार वह संपन्न करते हैं जिसे समाज में व्याप्त दहेज रूपी राक्षस को समाप्त कर दहेजमुक्त शादियां हो रही हैं इसमें संत रामपाल जी महाराज जी का अहम भूमिका है

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